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कैसे काम करते हैं मंत्र?

मंत्रों

में इतनी शक्ति है, लेकिन मंत्र काम कैसे करते हैं। एक ही मंत्र का निरन्तर मन ही मन उच्चारण करने से ध्वनि तरंगे उत्पन्न होती हैं। हां, हमें ना तो यह ध्वनि सुनाई देती है और ना ही तरंगें दिखाई देती है। यह कर्णातीत ध्वनि है। यानी कानों से न सुनी जा सकने वाली ध्वनि। ध्वनि तीनों तरह के मंत्रों के जाप से उत्पन्न होती है। मंत्र जाप तीन ही तरीके से किया जाता है। पहला वाचिक यानी आसन पर बैठकर मुख से मंत्र का उच्चारण करते हुए जाप करने को वाचिक कहते हैं। दूसरा उपांशु यानी आसन पर बैठकर मुख चलता रहे लेकिन शब्द बाहर न निकले मन ही मन उच्चारण होता रहे तो वह उपांशु जाप और तीसरा मानसिक जाप। इसके लिए किसी आसन की जरूरत नहीं आप कुछ भी कर रहे हैं, खाली बैठे हैं और मन ही मन किसी मंत्र का जाप चल रहा है तो यह मानसिक जाप हुआ। ध्वनि तीनों मंत्रों के जाप से उत्पन्न होती है। और ध्वनि से तरंगे उठती है। अंतरिक्ष में तीन तरह की तरंगे निरन्तर बहती रहती है। जब आपके मंत्र जाप से ध्वनि तरंगे निकलकर अतंरिक्ष में व्याप्त तरंगों से अणु-परमाणुओं से मिलकर ऊर्जा का विस्फोट करती है। तब मंत्र जाप से उत्पन्न ध्वनि शक्ति तीव्रता के साथ अतंरिक्ष के अणु-परमाणुओं को कंपाती हुई ध्यान वाले स्थान तक पहुचं जाती है। ध्यान वाला स्थान कौनसा? जिसका आप मंत्र जप रहे हैं। सूर्य या चन्द्र आदि ग्रहों से संबंधित मंत्र जाप है तो वह सूर्य-चन्द्र तक पहुंच कर पुनरू आप तक लौट आएगा और सकारात्मकता का संचार करेगा। किसी देव या देवी से संबंधित मंत्र है तो उन तक ध्वनि तरंगें पहुंचेगी और आपको उसका लाभ निश्चित मिलेगा।