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नवरात्र और शक्तिपीठ

आप सभी को मालूम है कि माँ सती के अंग जहां-जहां गिरे वे सभी स्थल शक्तिपीठ कहलाएं। आज ज्यादातर शक्तिपीठ हिन्दुस्तान में है तो कुछ बांग्लादेश, नेपाल, तिब्बत, श्रीलंका और पाकिस्तान में भी है। नवरात्रि के दिनों में शक्तिपीठ जाकर पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।

यदि आप नवरात्रि के दिनों में चार आदि शक्तिपीठों में से किसी का भी दर्शन करते है तो माँ की विशेष कृपा से धन्य होते है।

जहां माँ के पद गिरे थे, वो शक्तिपीठ जगन्ननाथ मंदिर के भीतर स्थित है।

बेहरामपुर उड़ीसा में माँ के स्तन गिरे थे उस स्थान को तारा-तरिणी के नाम से जाना जाता है।

योनिखण्ड जहां गिरा था उसे हम कामाख्या मंदिर के नाम से जानते है जो कि गौहाटी आसाम में है।

कालीघाट काली मंदिर जो कि कोलकता के पास स्थित है वहां माँ का मुख खण्ड गिरा था। इसके अलावा गुजरात में स्थित अम्बाजी जहां माँ का हृदय स्थान गिरा था। हिमाचल प्रदेश में स्थित ज्वालाजी मंदिर के दर्शनों की भी नवरात्रों के दिनों में विशेष मान्यता है।

शक्ति के बिना शरीर प्राणहीन है और जिन प्राणों में शक्ति का सबल है। वहां हर काम में विजय है। इसलिए प्रत्येक नवरात्रा में माँ के भक्तों को शक्तिपीठ के दर्शन अवश्य करने चाहिए।