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शिव ही रुद्राक्ष

दो शब्दों का मेल है रुद्राक्षए पहला श्रूद्रश् जिसका अर्थ है भगवान शिव और दूसरा श्अक्षश् जिसका अर्थ है आंसू। रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आंसुओं से मानी जाती है। कहते हैं एक बार भगवान शिव ने अपने मन को वश में कर दुनिया के कल्याण के लिए सैकड़ों वर्ष तप किया। एक दिन उनका मन दुखी हो गया। जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं तो उनमें से कुछ आंसू की बूंदे गिर गई। इन्हीं आंसू की बूदों से रुद्राक्ष नामक वृक्ष उत्पन्न हुआ। महादेव हमेशा भक्तों पर कृपा करते हैं। उनकी लीला से ही उनके आंसू ठोस आकार लेकर स्थिर ;जड़द्ध हो गए। जनधारणा है कि यदि शिव.पार्वती को प्रसन्न करना हो तो रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष एक प्रकार का जंगली फल हैए जो बेर के आकार का दिखाई देता है तथा हिमालय में उत्पन्न होता है। रुद्राक्ष नेपाल में बहुतायत में पाया जाता रुद्राक्षफल के सूखने के बाद ऊपर के छिलके को उतार कर प्राप्त गुठली ही असली रुद्राक्ष है। इस गुठली के ऊपर 1 से 21 तक धारियां बनी रहती हैंए इन्हें ही मुख कहा जाता है। रुद्राक्ष का महत्त्व यह है कि इसमें एक अनोखे तरह का स्पदंन होता है जो ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता हैए जिससे बाहरी ऊर्जाएं आपको परेशान नहीं कर पातीं। इसीलिए रुद्राक्ष ऐसे लोगों के लिए बेहद अच्छा है जिन्हें लगातार यात्रा की वजह से अलग.अलग जगहों पर रहना पड़ता है।

आकार के हिसाब से रुद्राक्ष के तीन भाग है-

1. उत्तम श्रेणी. जो रुद्राक्ष आकार में आंवले के फल के बराबर हो वह सबसे उत्तम माना गया है।

2. मध्यम श्रेणी. जिस रुद्राक्ष का आकार बेर के फल के समान हो वह मध्यम श्रेणी में आता है।

3. निम्न श्रेणी. चने के बराबर आकार वाले रुद्राक्ष को निम्न श्रेणी में गिना जाता है।

जिस रुद्राक्ष को कीड़ों ने खराब कर दिया हो या टूटा.फूटा होए या पूरा गोल न हो। जिसमें उभरे हुए दाने न हों। ऐसा रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। वहीं जिस रुद्राक्ष में अपने आप डोरा पिरोने के लिए छेद हो गया होए वह उत्तम होता है।

रंगों के आधार पर रुद्राक्ष की चार श्रेणीया है. सफेद रंग का रुद्राक्ष ब्राह्मण वर्ग काए लाल रंग का क्षत्रियए मिश्रित वर्ण का वैश्य तथा श्याम रंग का शूद्र कहलाता है।

रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर 21.मुखी तक होते हैंए जिन्हें अलग.अलग प्रयोजन के लिए पहना जाता है। इसलिए बस किसी भी दुकान से कोई भी रुद्राक्ष खरीदकर पहन लेना उचित नहीं होता। रुद्राक्ष नकारात्मकता से एक असरदार कवच की तरह बचाता है। कुछ लोग नकारात्मकशक्ति का इस्तेमाल करके दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं। प्राचीनकाल सेए आयुर्वेद में औषधीय उपयोगों के कारण रुद्राक्ष को मान्यता मिली है। इसकी माला पहनने से तनावए अनिद्राए चिंताए अवसाद से राहत मिलती और एकाग्रता बढती है दिमाग शांत रहता है और शरीर के तापमान को ठंडा रखता है। दिल की धड़कन और रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है। उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है। रुद्राक्ष लकवारोधी है। त्रिदोष को नियंत्रित करता हैं। मानसिक विकारों के रोगियों के लिए उपयोगी है और स्मरणशक्ति बढ़ाता है।

इसकी पहचान ज़रा कठिन है पर अगर आप संवेदनशील हैंए तो अपनी हथेलियों में लेने पर आपको दोनों में अंतर खुद पता चल जाएगा। ठीक इसी की तरह दिखने वाला एक बीज और है जो आसानी से मिलता है जो जहरीला होता हैए इसलिए इसे शरीर पर धारण नहीं करना चाहिए। इसके बावजूद कई जगहों पर इसे रुद्राक्ष बताकर बेचा जा रहा है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि जब भी आपको रुद्राक्ष लेना होए आप इसे किसी भरोसेमंद जगह से ही लें।

जब आप रुद्राक्ष धारण करते हैंए तो यह आपके प्रभामंडल ;औराद्ध की शुद्धि करता है। इस प्रभामंडल का रंग बिलकुल सफेद से लेकर बिलकुल काले और इन दोनों के बीच पाए जाने वाले अनगिनत रंगों में से कुछ भी हो सकता है। इसका यह मतलब कतई नहीं कि आज आपने रुद्राक्ष की माला पहनी और कल ही आपका प्रभामंडल सफेद दिखने लगे!

आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर और पवित्र जीवन व्यतीत करने के आतुर लोगों के लिए रुद्राक्ष वरदान सिद्ध हो सकता है। एक आश्रर्यजनक मोती की भांति रुद्राक्ष बेहतर प्रदर्शन और सफल जीवन हेतु बहुत मददगार है।

सावधानियां –

इस रुद्राक्ष माला को रात को सोते समय खोल कर सोना चाहिए और सुबह नहाने के बाद ॐ नमः शिवाय मन्त्र का जाप करते हुए पुनः धारण कर लेना चाहिए। हमेशा पानी साबुन पसीने और टेलकम पाउडर आदि के संपर्क से रुद्राक्ष को नुक्सान पहुँच सकता है। इस माला को लगातार पहनने के बाद सफाई करने के लिए कभीकभी रातभर गुनगुने पानी में डूबा कर रखें। सुबह कोमल प्लास्टिक ब्रश की सहायता से ज़रा सा रगड़ें और आखिर में स्वच्छः साधारण पानी से धो लें। इसके बाद माला के इन मानकों को सूखने दें। मनकों के सूखने के बाद एक छोटे ब्रश की सहायता से इन पर कोई भी तेल लगाएं। उसके बाद रुद्राक्ष मनकों के बीज मंत्र के उच्चारण के साथ सुगन्धित धूप दिखाकर चन्दन लगाए। 3.4 महीनों में एक बार थोड़ा कपूर का पाउडर इस माला के मनकों पर लगाए जिससे की कीड़े दूर रहें। रुद्राक्ष के ये मनके बहुत मज़बूत होते हैं और इनकी उम्र सैंकड़ों वर्ष की होती है। अच्छे रखरखाव से पीढ़ियों तक ये काम में लिए जा सकते हैं।