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समस्याओं का बोझ दूर कर देगी आपकी एक इंच मुस्कान

समस्याओं का बोझ दूर कर देगी आपकी एक इंच मुस्कान” समस्याएं कितनी ही जटिल, बोझिल क्यों न हो, उससे हतास होकर थक कर बैठ जाना उसका हल नहीं है……अपने उदास, मुम्हलाये चेहरे पर एक इंच मुस्कान लाईये। तो निश्चित समझिये कि मन समस्याओं के बोझ से हल्का हो जाएगा। मुस्कराने, हंसने से नव चेतना का सृजन होता है, हंसना-मुस्कराना मात्र कोई व्यायाम न होकर एक तरह का ध्यान है। यह न भूलें कि ऐसी आंतरिक प्रफुल्लता के बिना तो मूलाधार चक्र भी सक्रिय नहीं हो पाता। मुस्कान एक सुगंध है जो अपने से दूसरे की ओर बहती है, मुस्कान हंसी की कोई शिक्षा नहीं होती पर अन्य कलाओं के समकक्ष एक विशेष, अद्भुत कला है। इसे देखने, छूनें के लिए कहीं नहीं जाना पड़ता। यह तो आपके भीतर एक फूल की तरह खिलती है। यह स्वप्रेरित मनोरंजन है जिसका सम्बंध शुक्र से है। इस का सम्बंध उन अभिनैत्रियों से अधिक रहता है जिनकी मुस्कराहट-हंसी करोड़ों लोगों के दिल में बस जाती है।

हंसी-मुस्कराहट के संदर्भ में अभिनेत्री मधुबाला, माधुरी दीक्षित के उदाहरण उल्लेखनीय होंगे। जिनकी मंद-मंद मुस्कराहट फिर खिलखिला कर हंसने पर जैसे महकते फूल बरस रहे हो। अभिनेत्री प्रियंका चैपड़ा कहती है-’जो लोग मुस्कराना छोड़ देते हैं तो उनकी जिंदगी की खुशियां भी उनका साथ्ज्ञ छोड़ देती है। मुस्कुराना वह कला है, जो प्रकृति हमें मुफ्त में देती है जिससे किसी का भी दिल आसानी से जीता जा सकता है। यह एक ऐसी भाषा है जिसे इंसान से लेकर प्रकृति तक सभी समझते हैं। इसके द्वारा सबसे दिल के तार जुड़ जाते हैं। यह ईश्वर का ऐसा उपहार है, कि हम जिससे बात करते हुए मुस्कुराते हैं, तो यह मुस्कान उसके तथा अपने दोनों के मन की गांठें बड़ी आसानी से खोल देती हैं। मुस्कुराना हमारी जिंदगी का सबसे सकारात्मक पहले है। दुनिया में हर कोई, चाहे कोई अन्य भाषा हर कोई समझता है। दूसरे शब्दों में कहे तो जिंदगी जीने के लिए जितनी सांसों की जरूरत होती है उतनी ही दिल से दिल को जोड़ने वाली मुस्कुराहट वाली भाषा भी जरूरी है, क्योंकि यही एक जिंदगी को दूसरी जिंदगी से पलभर में जोड़ देती है।’ इस अभिनैत्री माना कि ’मिसवल्र्ड’ का ताज पहनने के समय उसी मुस्कराहटने सबसे बड़ा साथ दिया था।

ऐसा नहीं कि सिर्फ हम ही मुस्कराते हें बल्कि सौरमण्डल के ग्रह भी मुस्कराते हैं, चाहे सूर्य हो चन्द्रमा, मंगल हो या बुध, बृहस्पति हो या शुक्र-शनि। जातक पर इनकी शुभ अनुकूल दशा, शुभ दृष्टि उनकी प्रसन्नता का प्रतीक है। फिर प्रसन्नता की स्थिति में चेहरे पर मुस्कराहट नही हो, यह असंभव है। सच तो यह भी है कि जब बच्चे नींद की आगोश में मुस्कराते हैं तो, दरअसल वे भगवान से बात कर रहे होते हैं। इसका मतलब कि जब आप इस संसार में आये तब मुस्कराहट भी सााथ लाए थे। इसलिए खुद हंसिये मुस्काराईये। अपनी मुस्कराहट, उसकी सुगंध अपनी आस-पास, सबको बांटिये। लेकिन यह मुस्कान श्रीकृष्ण जैसी हो, बुध की, मीरा की, शिव की जैसी हो, जिसमें छल, नाटकीयता न हो।