About Suresh Shrimali Ji
सच हुई गुरुदेव सुरेश श्रीमालीजी की भविष्यवाणियां
हुए सत्ता कमजोेर करने के प्रयास तो आर्थिक व रक्षा क्षेत्र मेंं ऊंची छलांग
गुरुदेव सुरेश श्रीमालीजी की ओर से प्रतिवर्ष वार्षिक राशिफल में मेष से लेकर मीन राशि के जातकों के भविष्य के साथ ही देश-विदेश में नव संवत का क्या प्रभाव रहने वाला है, इसकी भी भविष्यवाणी की जाती है। वर्ष 2025 देश-दुनिया के लिए कैसा रहेगा में की गई सभी भविष्यवाणियां हर बार की तरह इस बार भी सच साबित हुई। देश में सत्ता को कमजोर करने के प्रयास होंगे, देश की आर्थिक स्थिति में उछाल आएगा, भारत की सैन्य क्षमता बढ़ेगी और रक्षा उत्पादन भी बढ़ेगा। ये चारों प्रमुख भविष्यवाणियां अक्षरश: सच साबित होती नजर आई है। सत्ता को कमजोर करने के लिए विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार पर एक के बाद एक प्रहार कर रहे हैं तो आर्थिक माेर्चें पर भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप मंे ऊभर कर सामने आया है। सैन्य क्षमता का लोहा पाक पर ऑपरेशन सिंदूर के समय पूरी दुनिया ने माना तो रक्षा उत्पादन में भारत जो आयात पर निर्भर रहता आया है आज निर्यात में अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी छलांग लगाते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है। भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। यह जानकारी अंतरर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट, जो कि अप्रैल 2025, में दी गई है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि भारत की जीडीपी अब 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो चुकी है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा,’भारत अब जापान को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। हमारी जीडीपी चार ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुकी है और ये कोई हमारा अनुमान नहीं, बल्कि आईएमएफ के आंकड़े हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश की नीतियां इसी तरह बनी रही तो आने वाले 2 से 3 सालों में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
भारत की जीडीपी और बढ़ने का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नई रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में भारत की जीडीपी 4.287 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि जापान की जीडीपी 4.186 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। यानी भारत अब जापान से आगे निकल चुका है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर का पूर्वानुमान “विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएँ-2025” रिपोर्ट के मध्य-2025 अद्यतन में वर्ष 2025 के लिये 6.6% से घटाकर 6.3% कर दिया गया है। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग द्वारा जारी की जाती है, जो यूएनसीटीएडी और पाँच यूएन क्षेत्रीय आयोगों के सहयोग से तैयार की जाती है। यह रिपोर्ट सतत् विकास लक्ष्यों पर केंद्रित, न्यायसंगत विकास नीतियों का समर्थन करने के लिये वैश्विक और क्षेत्रीय आर्थिक दृष्टिकोण प्रदान करती है।
सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था
भारत की जीडीपी वृद्धि दर वर्ष 2025 में 7.1% से घटाकर 6.3% कर दी गई है, लेकिन यह अभी भी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है और वर्ष 2026 में इसे 6.4% तक पहुँचने की उम्मीद है। मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति और रोज़गार का दृष्टिकोण: - मुद्रास्फीति वर्ष 2024 में 4.9% से घटकर वर्ष 2025 में 4.3% रहने का अनुमान है, जो आरबीआई के 2–6% के लक्ष्य क्षेत्र के भीतर है और यह प्रभावी मौद्रिक प्रबंधन को दर्शाता है। बेरोज़गारी सामान्य रूप से स्थिर बनी हुई है, हालाँकि श्रम शक्ति भागीदारी में लैंगिक असमानताएँ संरचनात्मक चुनौती बनी हुई हैं।
रक्षा उत्पादन:
रक्षा निर्यात मूल्य में भी लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है तथा भारत अब लगभग 100 देशों को निर्यात कर रहा है, जो भारतीय रक्षा क्षमताओं में बढ़ते वैश्विक विश्वास का संकेत है।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य
वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वर्ष 2025 में धीमी होकर 2.4% (2024 में 2.9%) और 2026 में 2.5% रहने का अनुमान है, जो उन्नत तथा उभरती दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर लागू होगी। टैरिफ एवं नीति अनिश्चितता के कारण अमेरिका की वृद्धि दर में गिरावट आने का अनुमान है, जबकि कमज़ोर मांग, निर्यात व्यवधान और रियल एस्टेट तनाव से प्रभावित चीन की वृद्धि दर वर्ष 2025 में 4.6% रहने का अनुमान है।
बढ़ी सेन्य क्षमता और रक्षा उत्पादन
कैसा रहेगा वर्ष 2025 की भविष्यवाणी करते हुए गुरुदेव सुरेश श्रीमाली ने कहा था कि भारत की सैन्य क्षमता में वृद्धि होगी और साथ ही रक्षा उत्पादन में भी वृद्धि होगी। ऐसा ही हुआ। भारत का रक्षा क्षेत्र अधिकांश निर्यात पर आधारित रहा है। लेकिन अब भारत आयात निर्भरता से निर्यात क्षमता की दिशा में रूपांतरित हो रहा है, जो रक्षा में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के क्रम में रक्षा उत्कृष्टता हेतु नवाचार तथा घरेलू उत्पादन एवं निर्यात में वृद्धि जैसी पहलों द्वारा प्रेरित है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तैनात किये गए स्काईस्ट्राइकर लोइटरिंग म्यूनिशन और एआई-संचालित निगरानी रोबोट जैसे प्रमुख परिणाम इसके प्रभाव को दर्शाते हैं।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन में वृद्धि
भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन वर्ष 2014-15 के 30-35% से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 65% हो गया, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, और वर्ष 2029 तक इसे 3 लाख करोड़ रुपए तक करने का लक्ष्य है। इसमें निजी क्षेत्र की प्रमुख भूमिका है, जिसका कुल रक्षा उत्पादन में 21% का योगदान है। वित्त वर्ष 2024-25 में 92% से अधिक पूंजी खरीद अनुबंध घरेलू फर्मों को दिये गए, जिसमें मेक इन इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से मज़बूत नीतिगत समर्थन देखा गया।
रक्षा निर्यात विस्तार
वित्त वर्ष 2013-14 और वित्त वर्ष 2024-25 के बीच भारत का रक्षा निर्यात 34 गुना से अधिक बढ़कर वर्ष 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जिसमें निज़ी क्षेत्र का योगदान रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से लगभग दोगुना है। भारत अमेरिका, फ्राँस और आर्मेनिया सहित 100 से अधिक देशों को डोर्नियर डीओ -228 विमान, चेतक हेलीकॉप्टर, बुलेटप्रूफ जैकेट, हल्के टॉरपीडो और इंटरसेप्टर नौकाओं का निर्यात करता है। भारत ने वैश्विक प्रभाव को मज़बूत करने के लिये वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपए तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास में तकनीकी प्रगति
भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास इंडेक्स और प्रौद्योगिकी विकास निधि के माध्यम से आगे बढ़ा है। इंडेक्स प्रोटोटाइप और रिसर्च किकस्टार्ट (स्पार्क) के लिये समर्थन के माध्यम से 1.5 करोड़ रुपए तक, इंडेक्स प्राइम के माध्यम से 10 करोड़ रुपए तक और इंडेक्स (अदिति) योजना के साथ अभिनव प्रौद्योगिकियों के विकास में सहायता के माध्यम से 25 करोड़ रुपए तक का वित्तपोषण प्रदान करता है।
सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण
भारत स्वदेशी और उन्नत आयातित प्रणालियों के मिश्रण के माध्यम से अपने सशस्त्र बलों का तीव्र आधुनिकीकरण कर रहा है। वर्ष 2025 में हवाई क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिये 156 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के लिये अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गए। ऑपरेशन सिंदूर में मिसाइलों, हैमर बमों और युद्ध सामग्री जैसे सटीक हथियारों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया। आधुनिकीकरण में घरेलू स्तर पर विकसित प्लेटफॉर्मों जैसे तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, अर्जुन एमके 1ए टैंक, एस्ट्रा एयर-टू-एयर मिसाइल और पिनाका रॉकेट सिस्टम पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। डीआरडीओ हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी, मानवरहित हवाई वाहन, और एंटी-सैटेलाइट हथियारों में प्रगति कर रहा है, जबकि एआई, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष-आधारित इंटेलिजेंस, सर्विलांस एवं रिकॉनिसेंस उपकरण भविष्य के युद्ध के लिये भारत की तैयारियों को आकार दे रहे हैं।
सत्ता कमजोर करने के प्रयास
वार्षिक राशिफल में देश में सत्ता को कमजोर करने के प्रयास होने की आशंका व्यक्त की गई थी और ऐसा ही हुआ भी। नरेन्द्र मोदी की तीसरी वार सरकार बनने के साथ ही विपक्षी दलों ने सरकार को कमजोर करने के प्रयास प्रारंभ कर दिए। सबसे पहले तो संसद की ओर से पारित वक्फ बोर्ड को लेकर देश भर में हंगामा प्रदर्शन और तोडफोड हुई और आखिर यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक जा पहुंचा। इसकेे बाद दिल्ली में एक जज के घर होली के दिन जलते हुए नोट मिलने को लेकर बडा बवाल खड़ा किया गया। उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के इस्तीफे को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा और कई आरोप भी लगाये। संसद के सभी सत्रों को विपक्ष ने एकजुट होकर चलने नहीं दिया। अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुचंने और वैलॅ में आकर हंगामा करने के साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लाए गए बिल को लेकर गृहमंत्री पर कागज फाड कर फेंके गए। बिहार में मतदाता सूची में संशोधन के लिए एसआइआर को लेकर संसद को ठप्प तो रखा ही। संसद के बाहर वोट चोरी का झूठा आरोप लगाकर कांग्रेस सहित सारे विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए। नित नए झूठे आरोपों को लेकर हालांकि विपक्ष के दावों की तत्काल पोल भी खुल गई और सत्ता को कमजोर करने के प्रयासों को झटका लगा। विपक्ष ने चुनाव आयोग, न्यायपालिका जैसी स्वायत्तशासी संस्थाओं पर आरोप लगाए तो सीबीआई, ईडी जैसी जांच एजेंिसयों पर सवाल खड़े कर उत्पात मचाया। खुद न्यायपालिका विवादों से घिरी रही। राज्यपाल और राष्ट्रपति के अधिकारों पर सर्वोच्च न्यायालय ने सवाल खड़े कर दिए।