सम्पूर्ण सुख-समृद्धि कल्प

आज व्यक्ति की सर्वप्रथम आवश्यकता ही आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होना है। व्यक्ति के पास धन का न होना सुखद जीवन का अंत ही माना जाता है। किसी भी लक्ष्मी साधना का तात्पर्य मात्र धनोपार्जन से नहीं अपितु समस्त भौतिक सम्पदा की पूर्ति है। व्यक्ति के पास धन-धान्य, यक्ष, कीर्ति, भवन, ऐश्वर्य सब कुछ हो वहीं धनवान है। धनवान या अरपति बनना कोई गुनाह या अधर्म नहीं है बल्कि ये तो मानव जीवन की श्रेष्ठता परन्तु इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि धन अनैतिक कार्यों से इक्ट्ठा न हो, गलत रास्तों से धन संचय न हो और किसी को धोखा देकर या हानि पहूंचाकर हम सम्पन्न न बनें बल्कि इज्जत, मान-मार्यादा, शास्त्रीय नियमों के अुनकूल विचारों के साथ ही साथ परिश्रम के द्वारा धन एकृत कर श्रीसम्पन्न बनें। 
शास्त्रों में लक्ष्मी से संबंधित कई अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और साधनाएं के बारे में वर्णन है। यह निश्चित हैं कि यदि सही प्रकार से साधना, पूजा-अर्चना या अनुष्ठान को सम्पन्न किया जाएं तो व्यक्ति जीवन की दरिद्रता को मिटा सकता है आर्थिक अभावों को समाप्त कर सकता है तथा जीवन की समस्त सुविधाएं और भौतिक सुख प्राप्त कर सकता है।  
यहां पर यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि साधना और धार्मिकता अपने आप में अलग-अलग बातें है। हम जो प्रातःकाल उठकर भगवान का नाम लेते है, माला फेरते है या अपने ईष्ट की पूजा करते हैं ये धार्मिक कार्य है। इसका साधना या अनुष्ठान से कोई संबंध नहीं है। धार्मिक कार्य से मन का शांति मिल सकती है परन्तु उससे भाग्य में परिवर्तन नहीं हो सकता, भाग्य में परिवर्तन साधना, पूजा-अर्चना या अनुष्ठान से ही हो सकता है। यह अनुष्ठान एक विशेष प्रकार की क्रिया सम्पन्न होना है। जिसमें एक निश्चित तरीके से निश्चित प्रकार से मंत्र जाप कर उस कार्य की सिद्धि प्राप्त करना होता है जिससे की हमारे भाग्य में यदि निर्धनता हैं तो उसे दूर किया जा सकेे। इसलिए आपको विशेष रूप से लाभान्वित करने के लिए गुरूदेव सुरेश श्रीमाली जी ने निर्माण किया हैं सम्पूर्ण सुख-समृद्धि दायक कल्प का।
 

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माँ लक्ष्मी को करें प्रसन्न कनकधारा यंत्र कल्प द्वारा

कनकधारा यंत्र माँ लक्ष्मी का सर्वाधिक प्रिय यंत्र हैं। यह अत्यन्त दुर्लभ, परन्तु लक्ष्मी प्राप्ति के लिए रामबाण है और अपने आप में अचूक, स्वयंसिद्ध, ऐश्वर्य प्रदान करने में सर्वथा समर्थ हैं। इस यंत्र का उपयोग दरिद्रता का नाश करता है। 
यदि आप बेरोजगार हैं या कई प्रकार के व्यवसाय कर हार चुके हैं अथवा गृहस्थ जीवन में आर्थिक अभाव को लेकर प्रतिकूलता है तो कनकधारा यंत्र साधना आपके लिए विशेष फलदायी है। शीघ्र धन प्राप्ति के लिए कनकधारा साधना विषेष रूप से प्रभावी है। इस यंत्र में कुछ ऐसी विशेषता है कि यह स्वयं ही गृहस्थ को अनुकूलता की ओर अग्रसर करता है, अर्थोपार्जन के कुछ ऐसे नए रास्ते बन जाते है जिस पर चलकर साधक या गृहस्थ अल्प समय में ही अपनी आवश्कताओं की पूर्ति में सफलता प्राप्त कर लेता है। 
यदि कनकधारा यंत्र के सामने बैठकर कनकधारा स्तोत्र का पाठ किया जाएं तो तुरन्त फलदायक होता है। मनुष्य अपने कर्जे से शीघ्र छुटकारा पा लेता है और अपनी दरिद्रता को दूर भागने में समर्थ हो पाता है। क्योंकि इस स्तोत्र की शब्द रचना ही कुछ इस प्रकार से रचित है कि एक विशेष अलौकिक, दिव्य प्रभाव उत्पन्न होता है।
न्यौछावर राशि – 3500/-
 
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लक्ष्मी प्रिय कुबेर कलश एवं श्रीफल

जैसाकि हम सभी जानते है कि श्रीकुबेर सुख-समृद्धि व सम्पदा के प्रतीक है और कुबेर में ही माँ लक्ष्मी का वास है। इसलिए माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कुबेर कलश एवं श्रीफल ही एक विशेष लक्ष्मीप्रदायक कल्प है। 

न्यौछावर राशि – 3100/-

 
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दक्षिणावृति शंख द्वारा

दक्षिणावृति शंख से आर्थिक, व्यापारिक उन्नति तथा पूर्ण भौतिक सफलता की प्राप्ति के लिए जितने अचूक व महत्वपूर्ण प्रयोग संभव वैसे अन्य किसी भी प्रकार के प्रयोग या मंत्र जप से संभव नहीं। इसलिए दक्षिणावृति शंख देवताओं की तरफ से मानव जाति को वरदान है जिससे वह अपने जीवन की दरिद्रता को मिटा सके और अपने जीवन काल में ही पूर्ण सफलता तथा सम्पन्नता प्राप्त कर सकें। 
धार्मिक दृष्टि से भी इस शंख को लक्ष्मी का प्रिय आभूषण बताया गया है और एक प्रकार से लक्ष्मी का ही प्रिय रूप माना जाता है, इसलिए जिसके घर के पूजा स्थान में यह शंख रखा रहता है, उसके घर में निरन्तर लक्ष्मी का वास बना रहता है। 
यदि दक्षिणावृति शंख को कारखानें या फैक्ट्री में स्थापित किया जाएं तो स्वतः ही उसकी दरिद्रता समाप्त हो जाती है और आर्थिक उन्नति होने लगती है। क्योंकि इस शंख को विशेष रूप से दारिद्रय निवारक कहा जाता है और इसके रहने से व्यापार में वृद्धि होती रहती है। 
साथ ही इस शंख पर कई प्रकार के अनुष्ठान भी सम्पन्न किए जाते हैं। यह शंख लक्ष्मी प्राप्ति, आर्थिक उन्नति, व्यापार वृद्धि में भी विशेष रूप से सहायक है और ऋण उतारने में तो यह प्रयोग अत्यधिक महत्वपूर्ण एवं प्रभावयुक्त है।
भक्तों यह एक ऐसा प्रभावशाली शंख है जिससे आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ ऋण मुक्ति, विवाह बाधा, गृहस्थ, शारीरिक व मानसिक परेशानियों से मुक्ति के साथ-साथ किसी भी प्रकार का टोना-टोटका या फिर बिक्री बढ़ाना इस तरह इन सभी समस्याओं का समाधान है सिर्फ और सिर्फ दक्षिणावृति शंख।
न्यौछावर राशि – 3500/-
 

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लक्ष्मी चरण पादुका

जैसाकि हम सभी जानते है कि माँ लक्ष्मी को कमल का पुष्प सर्वाधिक प्रिय है इसलिए दीपावली की पूजा के समय हम सभी उनको कमल पुष्प अवश्य चढ़ाते है क्योंकि कमल पुष्प सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है और कमल पर विराजमान देवी लक्ष्मी स्वयं सौभाग्यदायनी है। इसलिए सौभाग्य प्राप्ति हेतु कमल के पुष्प की सर्वाधिक मान्यता है। हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार कमल पुष्प की उत्पति भगवान श्रीहरि विष्णु की नाभि से हुई है इसलिए माँ लक्ष्मी को कमल पुष्प अत्यधिक प्रिय है। इसी प्रकार सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य व सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी माँ लक्ष्मी के साक्षात् निवास हेतु उनके चरण पादुका का अत्यधिक महत्व हमारे वेद-पुराणों मिलता है क्योंकि जहां-जहां लक्ष्मी के चरण होंगे वहां सुख-समृद्धि अवश्य विराजमान होगी। इसलिए विष्णु-लक्ष्मी प्रिय कमल पुष्प पर विराजमान श्रीलक्ष्मी चरण पादुका जहां भी स्थापित होंगी वहां स्वयं लक्ष्मी दौड़ी चली आएगी। 
न्यौछावर राशि – 2100/-
 

 

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अपने घर में लक्ष्मी का स्थाई निवास बनाएं लक्ष्मीप्रिय श्रीयंत्र द्वारा

श्रीयंत्र का अर्थ हैं- श्री का यंत्र अर्थात् माँ लक्ष्मी का घर। क्योंकि यंत्र शब्द निवास अथवा घर के अर्थ को ही प्रकट करता है और निवास में ही सभी वस्तुओं का नियंत्रण होता है। इसलिए सभी विद्याओं को समझने व प्राप्त करने के लिए श्रीयंत्र की शरण लेना आवश्यक है। 
आप सभी भक्तों के आशीर्वाद स्वरूप परम् पूज्य गुरूदेव सुरेश श्रीमाली जी ने अपनी दिव्य साधनाओं व अपनी अचूक शक्तियों द्वारा निर्माण किया हैं अलौकिक सुमेरुपृष्ठ श्रीयंत्र। 
यह दिव्य श्रीयंत्र व्यापार वृद्धि, ऋणमोचन, संतान लाभ तथा भौतिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इसलिए प्रत्येक गृहस्थी को अटूट सम्पत्ति, दरिद्रता का नाश, सम्पूर्ण ऐश्वर्य, भौतिक सुख-सम्पदा तथा अद्भुत ऐश्वर्य सिद्धि के लिए इस अलौकिक श्रीयंत्र को अपने घर में, दुकान या कार्यालय में स्थापित करना चाहिए। हमारे वेद-पुराणों व शास्त्रों के अनुसार यदि नया मकान या कारखाना बनवाना हो तो उसकी नींव में भी इस अलौकिक दिव्य श्रीयंत्र को स्थापित किया जाना चाहिए। जिससे उसमें रहने वाले सभी व्यक्तियों के जीवन में सुख-समृद्धि व ऐश्वर्य स्थापित रहें। इसलिए श्रीयंत्र को कलयुग में कामधेनु व कल्पवृक्ष के समान माना है। 
इस यंत्रराज की पूजा-अर्चना की जाएं तो मनुष्य के जीवन में भौतिक दृष्टि से किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता, घर में प्रसन्नता का प्रभाव बना रहता है, आर्थिक उन्नति तथा व्यापारिक सफलता के लिए यह यंत्र बेमिसाल है। इसलिए आप सभी भक्तजन महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंत्रसिद्ध श्रीयंत्रराज को अपने घर में स्थापित करें। क्योंकि मात्र स्थापित कर देने से ही यह असीम सफलता देने में सहायक बन जाता है। 
न्यौछावर राशि – 21000/-