दक्षिणावृति शंख से आर्थिक, व्यापारिक उन्नति तथा पूर्ण भौतिक सफलता की प्राप्ति के लिए जितने अचूक व महत्वपूर्ण प्रयोग संभव वैसे अन्य किसी भी प्रकार के प्रयोग या मंत्र जप से संभव नहीं। इसलिए दक्षिणावृति शंख देवताओं की तरफ से मानव जाति को वरदान है जिससे वह अपने जीवन की दरिद्रता को मिटा सके और अपने जीवन काल में ही पूर्ण सफलता तथा सम्पन्नता प्राप्त कर सकें।
धार्मिक दृष्टि से भी इस शंख को लक्ष्मी का प्रिय आभूषण बताया गया है और एक प्रकार से लक्ष्मी का ही प्रिय रूप माना जाता है, इसलिए जिसके घर के पूजा स्थान में यह शंख रखा रहता है, उसके घर में निरन्तर लक्ष्मी का वास बना रहता है।
यदि दक्षिणावृति शंख को कारखानें या फैक्ट्री में स्थापित किया जाएं तो स्वतः ही उसकी दरिद्रता समाप्त हो जाती है और आर्थिक उन्नति होने लगती है। क्योंकि इस शंख को विशेष रूप से दारिद्रय निवारक कहा जाता है और इसके रहने से व्यापार में वृद्धि होती रहती है।
साथ ही इस शंख पर कई प्रकार के अनुष्ठान भी सम्पन्न किए जाते हैं। यह शंख लक्ष्मी प्राप्ति, आर्थिक उन्नति, व्यापार वृद्धि में भी विशेष रूप से सहायक है और ऋण उतारने में तो यह प्रयोग अत्यधिक महत्वपूर्ण एवं प्रभावयुक्त है।
भक्तों यह एक ऐसा प्रभावशाली शंख है जिससे आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ ऋण मुक्ति, विवाह बाधा, गृहस्थ, शारीरिक व मानसिक परेशानियों से मुक्ति के साथ-साथ किसी भी प्रकार का टोना-टोटका या फिर बिक्री बढ़ाना इस तरह इन सभी समस्याओं का समाधान है सिर्फ और सिर्फ दक्षिणावृति शंख।
