श्रीयंत्र का अर्थ हैं- श्री का यंत्र अर्थात् माँ लक्ष्मी का घर। क्योंकि यंत्र शब्द निवास अथवा घर के अर्थ को ही प्रकट करता है और निवास में ही सभी वस्तुओं का नियंत्रण होता है। इसलिए सभी विद्याओं को समझने व प्राप्त करने के लिए श्रीयंत्र की शरण लेना आवश्यक है।
आप सभी भक्तों के आशीर्वाद स्वरूप परम् पूज्य गुरूदेव सुरेश श्रीमाली जी ने अपनी दिव्य साधनाओं व अपनी अचूक शक्तियों द्वारा निर्माण किया हैं अलौकिक सुमेरुपृष्ठ श्रीयंत्र।
यह दिव्य श्रीयंत्र व्यापार वृद्धि, ऋणमोचन, संतान लाभ तथा भौतिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इसलिए प्रत्येक गृहस्थी को अटूट सम्पत्ति, दरिद्रता का नाश, सम्पूर्ण ऐश्वर्य, भौतिक सुख-सम्पदा तथा अद्भुत ऐश्वर्य सिद्धि के लिए इस अलौकिक श्रीयंत्र को अपने घर में, दुकान या कार्यालय में स्थापित करना चाहिए। हमारे वेद-पुराणों व शास्त्रों के अनुसार यदि नया मकान या कारखाना बनवाना हो तो उसकी नींव में भी इस अलौकिक दिव्य श्रीयंत्र को स्थापित किया जाना चाहिए। जिससे उसमें रहने वाले सभी व्यक्तियों के जीवन में सुख-समृद्धि व ऐश्वर्य स्थापित रहें। इसलिए श्रीयंत्र को कलयुग में कामधेनु व कल्पवृक्ष के समान माना है।
इस यंत्रराज की पूजा-अर्चना की जाएं तो मनुष्य के जीवन में भौतिक दृष्टि से किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता, घर में प्रसन्नता का प्रभाव बना रहता है, आर्थिक उन्नति तथा व्यापारिक सफलता के लिए यह यंत्र बेमिसाल है। इसलिए आप सभी भक्तजन महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंत्रसिद्ध श्रीयंत्रराज को अपने घर में स्थापित करें। क्योंकि मात्र स्थापित कर देने से ही यह असीम सफलता देने में सहायक बन जाता है।
