गुरू पूर्णिमा – 29 जुलाई 2026
गुरू पूर्णिमा के अवसर पर गुरूर्वेश्वर साधना सम्पन्न करें एवं पाएं गुरूदेव का आशीर्वाद
गुरूब्र्रह्मा गुरूर्विष्णुर्गुरूर्देवो महेश्वरः। गुरूः साक्षात्परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।। अर्थात् गुरू ही ब्रह्मा, गुरू ही विष्णु तथा गुरू ही महेश है। गुरू साक्षात् परमब्रह्मा परमेश्वर है तथा जगत में सर्वत्र चराचर में व्याप्त है। ऐसे गुरूवर को विनम्र नमस्कार है।
सम्पूर्ण शास्त्रों में गुरू की भक्ति से बढ़कर कोई दूसरी भक्ति नहीं है। इसलिए गुरू पूजा बिना करोड़ों पुण्य भी व्यर्थ हो जाते हैं। शिष्य धर्म अति सरल है, क्योंकि उसमें मात्र गुरू का अनुशरण करना होता हैं परन्तु गुरू धर्म अत्यन्त कठिन है क्योंकि उन्हें हर शिष्य को मार्ग दिखाना होता है और उसके दुःखों का निवारण करके उसे ज्ञान प्रदान कर मोक्ष का मार्ग दिखाना होता हैं। इसलिए गुरू अपने शिष्यों की अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने के लिए उपदेश रूपी चिराग जलाता है और इसकी रोशनी के पथ पर चलकर शिष्यों को आत्म-ज्ञान मिलता है या आत्म-साक्षात्कार संभव हो पाता है।
तो पाठकों, हमारे पास शुभ अवसर है गुरू पूर्णिमा। जिसका लाभ उठाकर हम भी अपने गुरू के प्रति श्रद्धा, भक्ति व प्रेम का भाव प्रकट करके सदमार्ग की राह पर चलने का प्रयास करें। यदि आप भी इस शुभ अवसर का लाभ उठाने चाहते है तो आगामी 29 जुलाई को गुरू के महापर्व पर सम्पन्न करें ‘‘गुरूर्वेश्वर साधना‘‘। अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें:-
न्यौछावर राशि – 3500/-
